ANUJJ KUMMAR ASTROLOGER, NUMEROLOGIST, K.P. ASTROLOGY, LAL KITAB EXPERT
लाल किताब का पैंतीस (35) वर्ष का चक्र
🔹 पहला 35 वर्षीय चक्र (जन्म से 35 वर्ष तक)
| आयु (वर्ष) | महादशा ग्रह |
|---|---|
| 1 – 6 | शनि |
| 7 – 12 | राहु |
| 13 – 15 | केतु |
| 16 – 21 | गुरु |
| 22 – 23 | सूर्य |
| 24 | चंद्र |
| 25 – 27 | शुक्र |
| 28 – 33 | मंगल |
| 34 – 35 | बुध |
👉 इस प्रकार 35 वर्ष में एक पूरा चक्र पूरा होता है।
🔴 दूसरा चक्र कब से शुरू होता है?
-
36वें वर्ष से वही क्रम फिर से शुरू हो जाता है—
शनि → राहु → केतु → गुरु → सूर्य → चंद्र → शुक्र → मंगल → बुध
यही क्रम हर 35 वर्ष बाद दोहराया जाता है।
🔴 महादशा के अंदर अंतरदशाएँ (लाल किताब नियम)
🔹 शनि की महादशा (1–6 वर्ष)
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राहु की अंतरदशा – 2 वर्ष
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केतु की अंतरदशा – 2 वर्ष
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शनि की अंतरदशा – 2 वर्ष
🔹 राहु की महादशा (7–12 वर्ष)
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मंगल की अंतरदशा
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केतु की अंतरदशा
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राहु की अंतरदशा
🔹 केतु की महादशा (13–15 वर्ष)
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शनि की अंतरदशा
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राहु की अंतरदशा
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केतु की अंतरदशा
🔹 गुरु की महादशा (16–21 वर्ष)
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केतु की अंतरदशा
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गुरु की अंतरदशा
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सूर्य की अंतरदशा
🔹 सूर्य की महादशा (22–23 वर्ष)
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सूर्य की अंतरदशा
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चंद्र की अंतरदशा
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मंगल की अंतरदशा
🔹 चंद्र की महादशा (24वाँ वर्ष)
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गुरु की अंतरदशा
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चंद्र की अंतरदशा
-
सूर्य की अंतरदशा
🔹 शुक्र की महादशा (25–27 वर्ष)
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मंगल की अंतरदशा
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शुक्र की अंतरदशा
-
बुध की अंतरदशा
🔹 मंगल की महादशा (28–33 वर्ष)
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मंगल की अंतरदशा
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शनि की अंतरदशा
-
शुक्र की अंतरदशा
🔹 बुध की महादशा (34–35 वर्ष)
-
चंद्र की अंतरदशा
-
मंगल की अंतरदशा
-
बुध की अंतरदशा
🔴 लाल किताब का मूल सूत्र (35 साल चक्र)
❝ जीवन 35 वर्षों के चक्र में चलता है
हर चक्र में वही ग्रह, वही क्रम
महादशा के भीतर सीमित अंतरदशाएँ
और उन्हीं के अनुसार फल व उपाय ❞
लाल किताब में दशा आरंभ होने के दो मत
लाल किताब में किसी व्यक्ति की पहली महादशा तय करने के लिए दो अलग–अलग मत बताए गए हैं।
🔹 पहला मत: जन्म-समय की होरा से महादशा
इस मत के अनुसार—
-
व्यक्ति का जन्म जिस ग्रह की होरा में होता है
-
उसी ग्रह से उसकी पहली महादशा मानी जाती है
✨ उदाहरण
-
यदि जन्म सुबह 10 से 11 बजे के बीच हुआ है
👉 पहली महादशा चंद्र से शुरू होगी -
यदि जन्म दोपहर 1 से 4 बजे के बीच हुआ है
👉 पहली महादशा शुक्र से मानी जाएगी
📌 इसे होरा आधारित महादशा प्रारंभ कहा जाता है।
🔹 दूसरा मत: लग्न के ग्रह से महादशा
इस मत के अनुसार—
-
लग्न (पहला घर) में जो भी ग्रह बैठा हो
👉 उसी ग्रह से व्यक्ति की पहली महादशा शुरू होती है
🔸 लग्न में एक से अधिक ग्रह हों तो?
यदि लग्न में दो या अधिक ग्रह हों, तब—
-
पैंतीस (35) साल के चक्र की ग्रह-सीक्वेंस देखें
-
उस सीक्वेंस में जो ग्रह सबसे पहले आता है
👉 उसी ग्रह से लाल किताब की पहली महादशा मानी जाएगी
🔴 यदि लग्न (पहला घर) खाली हो तो क्या करें?
यदि पहला घर खाली हो, तो नीचे दिए गए क्रम से घरों को देखें—
👉 जिस घर में पहला ग्रह मिले, उसी ग्रह से पहली महादशा शुरू होगी।
🔹 घर देखने का क्रम (लाल किताब नियम)
-
सातवाँ घर
-
यदि ग्रह मिले → उसी ग्रह की महादशा सातवें वर्ष से
-
पहले के छः वर्ष पैंतीस साला चक्र के क्रम से चलेंगे
-
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यदि सातवाँ भी खाली हो → चौथा घर
-
चौथा भी खाली हो → दसवाँ घर
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ये तीनों खाली हों तो क्रम से देखें—
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तीसरा घर
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पाँचवाँ घर
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नौवाँ घर
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ग्यारहवाँ घर
-
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यदि ये भी खाली हों तो अंत में देखें—
-
दूसरा घर
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छठा घर
-
बारहवाँ घर
-
आठवाँ घर
-
📌 जिस घर में पहला ग्रह मिले,
👉 उसी ग्रह से लाल किताब की पहली महादशा मानी जाएगी।
नाबालिग कुंडली क्या होती है? (लाल किताब अनुसार)
नाबालिग कुंडली उसे कहा जाता है जब बंद मुट्ठी के घर अर्थात
पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव (1-4-7-10) में निम्न स्थितियाँ हों—
📌 नाबालिग कुंडली बनने की शर्तें
-
इन चारों घरों (1, 4, 7, 10) में कोई भी ग्रह न हो,
या -
इन चारों घरों में से किसी एक में केवल अकेला बुध बैठा हो,
या -
इन घरों में पाप ग्रह
-
शनि
-
राहु
-
केतु
इनमें से कोई एक, दो या तीनों बैठे हों।
-
👉 ऐसी कुंडली को नाबालिग कुंडली कहा जाता है।
🔴 नाबालिग कुंडली का प्रभाव
-
ऐसे जातक पर 12 वर्ष की आयु तक पिछले जन्म का प्रभाव माना जाता है।
-
जन्म से लेकर 12 वर्ष तक हर वर्ष एक विशेष ग्रह और एक विशेष घर सक्रिय रहता है।
-
उसी वर्ष के अनुसार ग्रह और भाव देखकर उपाय किए जाते हैं।
🔴 उपाय करने का मूल नियम (लाल किताब)
✔️ उपाय कैसे तय करें?
-
जिस वर्ष का फल देखना हो, उस वर्ष का सक्रिय घर (खाना) देखें।
-
यदि उस घर में कोई ग्रह बैठा है,
👉 उसी ग्रह का उपाय करें। -
यदि वह घर खाली है,
👉 उस घर के कारक (मालिक) ग्रह को देखें। -
वह कारक ग्रह कुंडली में जहाँ बैठा हो,
👉 उसी ग्रह और उसी घर का उपाय करें।
🔴 1 से 12 वर्ष तक सक्रिय घर और उनके कारक ग्रह
| वर्ष | सक्रिय घर (खाना) | कारक / मालिक ग्रह |
|---|---|---|
| 1 | 7वाँ घर | शुक्र |
| 2 | 4था घर | चंद्र |
| 3 | 9वाँ घर | गुरु |
| 4 | 10वाँ घर | शनि |
| 5 | 11वाँ घर | शनि |
| 6 | 3रा घर | बुध |
| 7 | 2रा घर | शुक्र |
| 8 | 5वाँ घर | सूर्य |
| 9 | 6ठा घर | बुध |
| 10 | 12वाँ घर | गुरु |
| 11 | 1ला घर | मंगल |
| 12 | 8वाँ घर | मंगल |
🔴 उदाहरण से समझें
✨ उदाहरण 1:
-
पहला वर्ष → 7वाँ घर सक्रिय
-
यदि 7वें घर में कोई ग्रह बैठा है → उसी ग्रह का उपाय
-
यदि 7वाँ घर खाली है →
-
7वें घर का कारक शुक्र
-
शुक्र कुंडली में जहाँ बैठा है → उसी स्थान के अनुसार शुक्र का उपाय
-
✨ उदाहरण 2:
-
आठवाँ वर्ष → 5वाँ घर सक्रिय
-
5वें घर में ग्रह हो → उसी ग्रह का उपाय
-
5वाँ घर खाली हो →
-
5वें घर का कारक सूर्य
-
सूर्य जहाँ बैठा हो → वहीं के अनुसार सूर्य का उपाय
-
🔴 निष्कर्ष (लाल किताब सूत्र)
जिस वर्ष का जो खाना (घर) माना जाए —
अगर उसमें ग्रह हो तो उसी ग्रह का उपाय,
और अगर ग्रह न हो तो उस घर के कारक ग्रह का उपाय,
वह ग्रह कुंडली में जहाँ बैठा हो —
उसी ग्रह और उसी घर का उपाय करना चाहिए।
🔴 नाबालिग टेवा देखते समय आवश्यक नियम (लाल किताब अनुसार)
🔹 1. ग्रहों की दृष्टि या आपसी टक्कर नहीं देखनी
नाबालिग टेवा का विचार करते समय
👉 ग्रहों की आपसी दृष्टि, युति या टक्कर नहीं देखी जाती।
यहाँ केवल यह देखा जाता है कि:
-
कौन-सा वर्ष सक्रिय है
-
कौन-सा घर (खाना) उस वर्ष प्रभावी है
-
उस घर में कौन-सा ग्रह बैठा है
🔹 2. एक घर में दो या अधिक ग्रह हों तो क्या करें?
यदि किसी सक्रिय घर में
दो या दो से अधिक ग्रह बैठे हों, तब—
-
अपने विवेक और अनुभव से यह तय करें कि:
-
कौन-सा ग्रह हानि, बाधा या खराब प्रभाव दे रहा है
-
-
👉 केवल उसी ग्रह का उपाय किया जाता है
-
सभी ग्रहों के उपाय एक साथ नहीं किए जाते
⚠️ लाल किताब में अनावश्यक उपाय वर्जित माने गए हैं।
🔹 3. नाबालिग टेवा का उपाय जीवनभर के लिए होता है
-
नाबालिग टेवा का उपाय
👉 एक बार सही तरीके से कर लिया जाए,
तो वह जीवन भर प्रभावी रहता है। -
बार-बार उपाय बदलना या दोहराना आवश्यक नहीं होता।
🔹 4. जीवन में कार्य शुरू करने का विशेष नियम
नाबालिग टेवा वाले जातक को—
-
कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले
👉 घर के कम से कम पाँच लोगों को अवश्य बताना चाहिए -
या उनकी सलाह लेकर कार्य आरंभ करना चाहिए
📌 ऐसा करने से:
-
बाधाएँ कम होती हैं
-
निर्णय में स्थिरता आती है
-
नाबालिग टेवा का दुष्प्रभाव नियंत्रित रहता है
🔴 नाबालिग टेवा – लाल किताब सूत्र
❝ न दृष्टि देखो, न टक्कर
केवल वर्ष और खाना देखो
जहाँ दोष हो, वहीं उपाय करो
और कार्य शुरू करने से पहले
पाँच लोगों की सलाह लो ❞
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