ANUJJ KUMMAR ASTROLOGER, NUMEROLOGIST, K.P. ASTROLOGY, LAL KITAB EXPERT लाल किताब का पैंतीस (35) वर्ष का चक्र 🔹 पहला 35 वर्षीय चक्र (जन्म से 35 वर्ष तक) आयु (वर्ष) महादशा ग्रह 1 – 6 शनि 7 – 12 राहु 13 – 15 केतु 16 – 21 गुरु 22 – 23 सूर्य 24 चंद्र 25 – 27 शुक्र 28 – 33 मंगल 34 – 35 बुध 👉 इस प्रकार 35 वर्ष में एक पूरा चक्र पूरा होता है। 🔴 दूसरा चक्र कब से शुरू होता है? 36वें वर्ष से वही क्रम फिर से शुरू हो जाता है— शनि → राहु → केतु → गुरु → सूर्य → चंद्र → शुक्र → मंगल → बुध यही क्रम हर 35 वर्ष बाद दोहराया जाता है । 🔴 महादशा के अंदर अंतरदशाएँ (लाल किताब नियम) 🔹 शनि की महादशा (1–6 वर्ष) राहु की अंतरदशा – 2 वर्ष केतु की अंतरदशा – 2 वर्ष शनि क...
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ASTROLOGER ANUJJ KUMMAR Contact-9212792755 लाल किताब ज्योतिष एक अनोखी और प्रभावशाली विद्या है, जिसकी शुरुआत 20वीं शताब्दी के मध्य में हुई। यह ज्योतिष की पारंपरिक शाखाओं से अलग एक विशिष्ट प्रणाली है, जिसमें ग्रहों के प्रभाव और उनके उपचार (उपाय) पर विशेष बल दिया गया है। लाल किताब की रचनाएं उर्दू भाषा में की गई थीं, लेकिन समय के साथ इसका हिंदी और अन्य भाषाओं में अनुवाद हुआ और यह आम जनमानस में लोकप्रिय हो गई। लाल किताब की सबसे बड़ी विशेषता इसके सरल और व्यवहारिक उपाय हैं, जिन्हें “टोटके” भी कहा जाता है। ये उपाय आमतौर पर सस्ते, आसान और बिना किसी धार्मिक विधि-विधान के किए जा सकते हैं। जैसे कि कुत्ते को रोटी खिलाना, कुएं में सिक्का डालना, या शनिवार को काले तिल बहाना — ये सब लाल किताब के प्रभावशाली उपायों में गिने जाते हैं। यह किताब जन्मपत्रिका (कुंडली) को अलग नजरिए से देखती है और ग्रहों को “घर” और “स्थान” के आधार पर विश्लेषित करती है। लाल किताब में कई बार पारंपरिक ज्योतिष से अलग निष्कर्ष निकलते हैं, जो इसे खास बनाते हैं। हालांकि, लाल...